​ ​ शादियों में खाप का दखल गैर-कानूनी, प्यार पर पहरा नहीं होगा बर्दाश्त ..!
Wednesday, September 26, 2018 | 1:31:44 AM

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शादियों में खाप का दखल गैर-कानूनी, प्यार पर पहरा नहीं होगा बर्दाश्त ..!

Wednesday, March 28, 2018 09:11:25 AM , Viewed: 3546
  • नई दिल्लीः उच्‍चतम न्‍यायालय ने आपसी सहमति और अंतर जातीय विवाह करने वाले दंपत्तियों को राहत देते हुए ऐसे मामलों में खाप पंचायतों के हस्‍तक्षेप को पूरी तरह गैर कानूनी बताया है। प्रधान न्‍यायाधीश दीपक मिश्रा, न्‍यायमूर्ति ए एम खानवलिकर और न्‍यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने हस्‍तक्षेप रोकने के लिए कानून बनाने के दिशा निर्देश भी जारी किए हैं। शीर्ष न्‍यायालय ने कहा है कि यह दिशा निर्देश तब तक लागू रहेंगे जब तक संसद इस संबंध में उचित कानून नहीं बना लेती।

    गैर-सरकारी संगठन शक्ति वाहिनी ने 2010 में सम्‍मान के नाम पर होने वाली हत्‍याओं को रोकने और ऐसे दंपत्तियों की सुरक्षा के लिए उच्‍चतम न्‍यायालय में याचिका दायर की थी। इसी याचिका के संदर्भ में यह दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।

    इस फैसले से खाप पंचायतें संतुष्ट नहीं हैं। खाप पंचायतों ने जहां सरकार व कोर्ट से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है वहीं सामाजिक ताना-बाना कायम रखने के लिए खाप पंचायतों के फैसले को मान्यता देने की मांग उठाई है। खापों का कहना है कि खाप कभी आनर किलिंग की इजाजत नहीं देती बल्कि आपसी भाईचारा को कायम रखने के लिए कड़े फैसले लेती हैं।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर खाप प्रधानों व प्रतिनिधियों से बात की तो सबका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट को अपने फैसले पर पुर्नविचार करना चाहिए। अगर ऐसा ही रहा तो आपसी रंजिश बढ़ेगी और खून-खराबा होगा। ऐसे में खापों के निर्णय को कानूनी रूप से मान्यता मिलनी चाहिए। सांगवान खाप 40 के प्रधान सोमबीर सांगवान कहते हैं कि कोर्ट का निर्णय मान्य है, मगर सामाजिक तानाबाना बनाने के लिए खापों की अहम भूमिका होती है। ऐसे में समाज हित को देखते हुए खापों द्वारा फैसले लेेने पड़ते हैं।

    खाप कभी आनर किलिंग की नहीं देती इजाजत
    सांगवान के अनुसार एक ही गांव में शादी करना हिंदू धर्म के विरूद्ध फैसला देने से पूर्व क्षेत्रवाइज सर्वे करवाकर ऐसे फैसले देने चाहिए। समाज की परपंपरा कायम रखने के साथ-साथ समाज में भाईचारा व सभी वर्गों में एकता बनाए रखने के लिए पंचायतों के फैसले सर्वमान्य होने चाहिए।

    वहीं फौगाट खाप के प्रधान रामदास फौगाट ने कहा कि अंतरजातीय विवाह पर रोक लगे। क्योंकि ऐसा होने से जहां हिंदू धर्म के विरूध होगा वहीं आपसी रंजिश बढ़ेगी। समाज में मनमुनाटव पैदा होते हैं। रामदास फौगाट ने कोर्ट के निर्णय पर असंतुष्टि जाहिर करते हुए इस निर्णय पर पुर्नविचार करने के साथ-साथ पंचायतों के फैसलें को सरकार व कोर्ट से मान्यता देने की मांग उठाई।

    याचिकाकर्ता को नहीं उत्तर भारत के रीतिरिवाजों की जानकारी
    सोनीपत में दहिया खाप के प्रधान सुरेंदर ने कहा ने कि खाप हमेशा समाज के उथान के लिए काम करती है। जिस संस्था ने कोर्ट में याचिका लगाई थी उसे उत्तर भारत के रीतिरिवाजों के बारे जानकारी नहीं है। एक परिवार और गांव में शादी से हमारा डीएनए खराब हो जाएगा। किसी को भी रीतिरिवाज के खिलाफ नहीं जाने दिया जाएगा ओर हिन्दू मेरिज एक्ट में बदलाव की जरूरत है जो पार्टी ऐसा करेगी खाप उनके साथ होगी।
     
    इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से कानून बनाए जाने तक गाइडलाइन जारी की है.
    1.
    सभी राज्य सरकारें पिछले पांच साल के दौरान जिन गांवों और जिलों में ऑनर किलिंग हुई है उनकी पहचान करें.

    2. सभी प्रभावित राज्यों के गृह सचिव इस बारे में संबंधित जिलों के SP को निर्देश दें कि वो उन पुलिस थानों की पहचान कर विशेष ध्यान दें, जहाँ अंतरजातीय विवाह हो रहे हैं.

    3. कहीं भी खाप पंचायत होने की सूचना मिलते ही बड़े अधिकारियों के साथ ही SP और DSP को भी सूचित किया जाए.

    4. सूचना मिलने के फौरन बाद DCP खाप पंचायत के लोगों से संपर्क करें और अगर शादी (अंतरजातीय) को लेकर पंचायत हो रही है तो उन्हें समझाया जाए. अधिकारी बताएं कि इस विषय पर इस तरह की मीटिंग करने की अनुमति नहीं है. उनको रोकने के लिए पंचायत वाली जगह पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात की जाए.

    5. अगर मना करने के बाद भी कोई मीटिंग होती है, तो कानून के तहत कार्रवाई की जाए और अफसर पूरी पंचायत की वीडियो रिकॉर्डिंग करें.

    6. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर DSP को भरोसा हो जाए कि समझाने के बाद वो नहीं मानेंगे, तो SDM, SP को सूचित करें ताकि समय रहते हुए धारा 144 लगाई जा सके और धारा 151 के तहत गिरफ्तारी की जा सके.

    7. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस को ये भरोसा हो जाए कि शादी करने वाले जोड़े और परिवार वालों को खतरा हो सकता है, तो तुरंत DM, SDM को सूचित करें ताकि एहतियात के तौर पर कुछ उपाय किया जा सकें.

    8. पुलिस के सुरक्षा उपायों के लागू करने के बाद भी खाप पंचायत होती है और पंचायत आदेश जारी करती है, तो पुलिस तुरंत धारा 141, 143, 503 और 506 के तहत FIR दर्ज करे.

    9. FIR दर्ज होते ही इसकी सूचना SP, DSP को दी जाए.

    10. जोड़े और उनके परिवार वालों को तुरंत सुरक्षा मुहैया कराई जाए. सुरक्षित घर जिले में दिए जाएं. हर जिले में सुरक्षित घर बनाए जा सकते हैं. इन सुरक्षित घरों में वो कपल रहेंगे जिनके शादी के खिलाफ परिवार वाले, पंचायत या दूसरे लोग हैं. ये सुरक्षित घर SP और DM के निगरानी में चलेंगे.

    गैर-जातीय विवाह को राज्य सुरक्षा दे
    - सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने भी कोर्ट को बताया कि गैर-जातीय विवाह की स्थिति में राज्य सरकारों को चाहिए कि वे शादीशुदा जोड़े को सुरक्षा दें। अगर जोड़े को धमकी दी जाती है तो उन्हें मैरिज अफसरों से इस बात की शिकायत करनी चाहिए।
    - कोर्ट ने ये भी कहा था कि खाप पंचायतें समाज के पहरेदार की तरह काम न करें। दो वयस्कों की शादी कानून द्वारा तय होती है।

    पिछली सुनवाई में कोर्ट ने लगाई थी फटकार
    - पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा था, "चाहे वे पैरेंट्स हों, समाज हो या कोई और वे सब इससे अलग हैं। किसी को भी चाहे वह कोई एक शख्स हो, एक से अधिक लोग हों या समूह उन्हें (बालिगों की) शादी में दखल का हक नहीं है।"
    - इससे पहले जनवरी में हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बालिग लड़का या लड़की अपनी मर्जी से शादी कर सकते हैं। कोई पंचायत, खाप पंचायत, पैरेंट्स, सोसायटी या कोई शख्स इस पर सवाल नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार खाप पंचायतों पर बैन नहीं लगाती तो कोर्ट एक्शन लेगा।

    NGO की पिटीशन पर सुनवाई कर रहा था SC
    - सुप्रीम कोर्ट एक गैरसरकारी संगठन शक्ति वाहिनी (एनजीओ) की पिटीशन पर सुनवाई कर रहा था।
    - पिटीशन में मांग की गई थी कि इस तरह के अपराधों पर रोक लगनी चाहिए। उत्तर भारत खासतौर पर हरियाणा में कानून की तरह काम कर रही खाप पंचायतें या गांव की अदालतें परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी करने वालों को सजा देती हैं।

    क्या होती है खाप पंचायत?
    - खाप लोगों का समूह होता है। एक गोत्र या जाति के लोग मिलकर एक खाप-पंचायत बनाते हैं, जो पांच या उससे ज्यादा गांवों की होती है।
    - इन्हें कानूनी मान्यता नहीं है। इसके बावजूद गांव में किसी तरह की घटना के बाद खाप कानून से ऊपर उठ कर फैसला करती हैं।
    - खाप पंचायतें देश के कुछ राज्यों के गांवों में काफी लंबे वक्त से काम करती रही हैं। हालांकि, इनमें हरियाणा की खाप पंचायतें कुछ अलग पहचान रखती हैं। कहा जाता है कि खाप की शुरुआत की हरियाणा से ही हुई थी। उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी खाप पंचायतें विवादित फैसले करती रही हैं।

    खाप पंचायतों के फैसले
    - 2014 में यूपी की एक पंचायत ने लड़कियों के जींस पहनने और मोबाइल रखने पर बैन लगा दिया था। पंचायत ने जींस-मोबाइल को यौन शोषण के लिए जिम्मेदार बताया था।
    - 2015 में राजस्थान के नोतारा भोपत गांव की खाप ने एक महिला को एक शख्स के साथ रहने का आदेश दिया था। इस शख्स की पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी।

       अब इंतजार है कि सरकार कब तक इस बारे में कानून बनाती है. उसमें विधि आयोग की सिफारिशें कितनी शामिल हो पाती हैं.

Reporter : ArunKumar,
RTI NEWS


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