​ ​ 20 बच्चों की मौत पर एलएसडीएसएस ने स्वास्थ्य मंत्रालय को लिखा पत्र
Saturday, December 15, 2018 | 8:35:07 PM

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20 बच्चों की मौत पर एलएसडीएसएस ने स्वास्थ्य मंत्रालय को लिखा पत्र

Thursday, November 29, 2018 15:28:06 PM , Viewed: 838
  •  नई दिल्ली, 28 नवंबर | भारत में नेशनल पॉलिसी ऑन रेयर डिजीज को लागू हुए 78 सप्ताह बीत चुके हैं, साथ ही आवंटित किया गया 100 करोड़ रुपये का फंड खत्म हो चुका है लेकिन समय पर उपचार न मिलने के कारण 20 से अधिक बच्चे अपनी जान गंवा चुके हैं।

      इस संबंध में लाइसोसोमल स्टोरेज डिस्ऑडर्स सपोर्ट सोसायटी (एलएसडीएसएस) ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को एक पत्र लिखकर जवाब मांगा है, हालांकि अभी तक सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है। एनएसडीएसएस के अध्यक्ष मनजीत सिंह ने कहा, "सरकार जवाब देने में विलंब कर रही है और रोगी जान गंवा रहे हैं। यह समझने की आवश्यकता है कि प्रत्येक जीवन बहुमूल्य है। हमने मनोहर अगनानी (संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय) को एक पत्र लिखा था और नेशनल पॉलिसी ऑन रेयर डिजीज के तहत प्रस्तुत आवेदन वाले रोगियों के उपचार पर जवाब मांगा था। लेकिन कोई जवाब नहीं आया है।"

    उन्होंने कहा, "हमने हाल ही में प्रीति सूडान (सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय) को एक पत्र लिखा, जिसमें कहा गया है कि रोगी उपचार की प्रतीक्षा कर रहे हैं और हमने उनके उपचार के लिए फंड के आवंटन का अनुरोध किया। दुर्भाग्य से उनका भी उत्तर नहीं आया, जो कि दुखद है।"

    मनजीत सिंह ने कहा, "इस पॉलिसी में कई कमियां हैं और रोगी के आवेदन की प्रक्रिया थका देने वाली है। पॉलिसी में सेंट्रल टेक्निकल कमेटी (सीटीसी) और पृथक स्टेट टेक्निकल कमेटी(एसटीसी) को स्थापित करने के लिए कहा गया है। इससे रोगी आवेदन और फंड वितरण की प्रक्रिया सरल हो सकती थी। कुछ राज्य रोगियों की पहचान कर चुके हैं और एसटीसी बना चुके हैं, लेकिन सीटीसी ने किसी आवेदन पर कार्य नहीं किया है।"

    मनजीत सिंह ने पूछा, "सीटीसी द्वारा अनुमोदन के बाद ही फंड पीआईपी (60 : 40 अनुपात) के तहत पंजीकृत हॉस्पिटल को जाता है। लेकिन केन्द्र सरकार ने आज तक एक रुपया भी आवंटित या स्थानांतरित नहीं किया है। आवेदन प्रक्रिया (सरकारी हॉस्पिटल के फिजिशियन का पर्चा, लैब टेस्ट की सही रिपोर्ट और उपचार की अनुशंसा) को सरल बनाने के अलावा वार्षिक फंड का आवंटन भी आवश्यक है, ताकि नीति के अंतर्गत पहचाने गये रोगियों का उपचार शुरू हो सके।"

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