​ ​ 'कानूनी अधिकारों के बिना नहीं हो सकता विकास के नाम पर ध्वस्तीकरण'
Wednesday, March 20, 2019 | 1:52:59 PM

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'कानूनी अधिकारों के बिना नहीं हो सकता विकास के नाम पर ध्वस्तीकरण'

Sunday, February 17, 2019 11:42:53 AM , Viewed: 1556
  • कानूनी अधिकार तय किए बिना नहीं हो सकता ध्वस्तीकरण, जीरो मास्टर प्लान के तहत काशी या प्रयाग में क्षेत्र की सड़क चौड़ीकरण के लिए ध्वस्तीकरण से पूर्व आपत्तियों पर विचार जरूरी
     

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि मास्टर प्लान के तहत सड़कों को चौड़ा करने के लिए भवनों के ध्वस्तीकरण से पूर्व भवन स्वामी का कानूनी अधिकार तय करना जरूरी है। अवैध निर्माण या अतिक्रमण को हटाने से पहले पूर्व की सूचना देना और आपत्तियों पर विचार करना आवश्यक है। ऐसा किए बिना ध्वस्तीकरण नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा है कि ध्वस्तीकरण से पहले सरकार हिंदी और अंग्रेजी के अखबारों में इसकी सूचना प्रकाशित करे और आपत्तियों का निस्तारण करे।

    अवैध निर्माण या अतिक्रमण सरकारी जमीन पर है या निजी भूमि पर यह तय किया जाना जरूरी है। यदि निर्माण अवैध नहीं है तो सरकार भूमि अधिग्रहीत कर मुआवजा देने के बाद ध्वस्तीकरण कर सकती है। सिर्फ शासनादेश जारी कर किसी की भूमि नहीं ली जा सकती है।

    कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 300(ए) के तहत किसी भी नागरिक को बगैर कानूनी प्रक्रिया अपनाए संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। वाराणसी लहरतारा के राय अजय कुमार और 15 अन्य की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल और न्यायमूर्ति वीपी वैश की पीठ ने दिया। कोर्ट ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे याची के मकान का ध्वस्तीकरण उसकी आपत्ति को सुनकर किया जाए।

    याचीगण का कहना था कि वह 60 से 80 वर्षों से मकान में रह रहे हैं।1910 में तत्कालीन जमींदार राय शंभू प्रसाद और राय शिवप्रसाद तथा जिलाधिकारी व अन्य लोगों के बीच जीटी रोड के चौड़ीकरण को लेकर सहमति बनी थी। 10 अक्तूबर 1911 को हुए समझौते के अनुसार जीटी रोड पर कोई अतिक्रमण नहीं था। अब 1992 में अतिक्रमण दस्ते ने फिर से कार्रवाई शुरू की। लहरतारा से राजघाट तक अतिक्रमण अभियान चलाया गया। इसकी न तो सूचना दी गई और न ही मुआवजा दिया गया। जो अतिक्रमण हटाया जा रहा है, वह सरकार की जमीन पर नहीं है। वह भूमि याची की है। कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत ही सरकार किसी की जमीन ले सकती है। कानूनी प्रक्रिया अपनाए बिना सरकार को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है।

Reporter : Arunkumar,
RTI NEWS


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