​ ​ पढ़ें: पुनर्जन्म कहानी, परिवारों की जुबानी..!
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पढ़ें: पुनर्जन्म कहानी, परिवारों की जुबानी..!

Thursday, December 20, 2018 20:56:50 PM , Viewed: 1127
  • अहमदाबादः गुजरात के आणंद जिले के सुन्दरणा गांव में रहने वाले महेशभाई सोलंकी के परिवार में पुनर्जन्म की एक कहानी सामने आयी है। परिवार को भी इस बात की जानकारी तब हुयी जब पूरा परिवार रणुजा पद यात्रा के लिए गया हुआ था वहा पहुंचने के बाद इस परिवार के चार वर्षीय बच्चे बादल ने लगभग दो हजार लोगो के बिच में अपने पिछले जन्म के दादाजी को पहचान लिया और बिना संकोच दौड़ते हुए उनके गले लिपट गया।हिन्दू धर्म के मूल सिद्धांतो में से पुनर्जन्म के एक सिद्धांत को भी माना जाता है। हर प्राणी को  चौरासी योनियों के  जन्म से गुजरना होता है। और शास्त्रों में भी इस बात देखने मिलता है।

    इसी तरह का यह किस्सा इस जनम के बादल और पूर्व जन्म के जयदीप का है। बात अगर पूर्व जन्म के जयदीप की की जाये तो अहमदाबाद के बावला तालुका  रास गांव में रहने वाले एक  ठाकोर परिवार में साल 2014 में एक ऐसी घटना घटीत हुयी  थी जिससे इस परिवार का सुख हमेशा के लिए छीन गया था एक 16 साल के बच्चे जयदीप का रणुजा यात्रा के दौरान  उपस्थिति में निधन हो गया था। इस घटना ने पुरे परिवार का सुख चेन छीन लिया था.मिटटी से बने इस घर में कनुभाई ठाकोर का परिवार कई सालो से बावडा के रासम गांव में रहता है, जिसकी   2014 में अपने दादा के साथ द्वारका पदयात्रा के दौरान मौत हो गयी थी और इस बात का गम परिवार के साथ उसके दादाजी को खाये जा  रहा था। दादाजी मनुभाई  को ये बात खाये जा रही थी की उनका पोता जयदीप उनके साथ ही यात्राधाम गया था जहा उसकी अचानक मौत हो गयी थी। और अब बस उसकी याद के रूप में उसके फोटो बचे थे। लेकिन कुछ साल बाद मनुभाई फिर यात्रा धाम के लिए निकले जहा उनका वही पोता फिर जन्म लेकर वापस मिल गया।

    जब मनुभाई यात्रा पर गए तब एक अजनबी चार साल का बच्चा अचानक ही आकर दादाजी मेरे दादाजी कहकर उनसे लिपट गया। तब मनुभाई ने बच्चे को गले लगाकर उसे चॉकलेट और पांच रूपये दिए। उसके बाद मनुभाई का बादल नामक इस बच्चे से उनके पोते जयदीप जैसा ही लगाव हो गया क्यों की इस चार वर्षीय  बच्चे की सभी बाते आदते जयदीप से मिलती जुलती थी।बादल सोलंकी आणंद जिले के पेटलाद का रहने वाला है।

    जो बार बार अपने इस जन्म के मातापिता को अपने द्दाजी से मिलने की जिद करने लगा और दादा -पोते का संबंध  एक बार फिर कायम हो गया। एक बार जब बादल बीमार पड़ा तो अपने दादाजी से मिलने की जिद करने लगा। तब बादल के मातापिता उसे आणंद से लेकर अहमदाबाद के बावला पहुंचे। वह पहुंचते ही पता लाग की बच्चा अपने घर गांव के रस्ते सभी ऐसे जनता था जैसे उसका जन्म वही हुआ हो और दौड़ते हुए वो अपने आप ही मनु भाई के घर में चला गया। 

    यह घटना बादल के मातापिता देख आश्चर्यचकित हो गए और पुनर्जन्म की मान्यता पर उन्हें भी भरोसा होने लगा। जब बच्चे को गोद से उतारा गया तो वो दौड़ के घर के नजदीक बने मंदिर में भगवन को हाथ जोड़ने भागा। तब उसके दादा ने बदल के मातापिता को बताया की जयदीप बहुत संस्कारी था और भगवान में भरोसा करने वाला लड़का था ,वो रोज सुबह इसी मंदिर में दर्शन करने जाया करता था। जब मनुभाई ने अपने घर में रखे फोटो अल्बम को चार वर्षीय बदल को बताया तो उसमे मौजूद जयदीप के फोटो को उसका स्वयं का फोटो होने की बात कही, और जयदीप के फोटो से बादल का चेहरा काफी मेल खाता है , तब सब ने मान लिया की बादल यानि जयदीप का पुनर्जन्म हुआ है।

    इस घटना में खास बात यहाँ है की जयदीप के मरने की तारीख और बादल के जन्म की तारीख एक ही है। जयदीप की मौत 13 मार्च 2014 के दिन रात के बारह बजे के आसपास हुयी थी उसी वक्त ही बादल का जन्म हुआ ,बादल जयदीप की बहनो मातापिता ,दादा सबको पहचानता है और उनसे पुरानी सभी बाते करता है ,इन सब बातो को एक जैसा देख गांव के लोग भी मैंने लगे है की जयदीप का बादल के रूप में पुनर्जन्म हुआ है। और मनुभाई के परिवार के साथ पुरे गांव के लोग खुश है। अब बादल के पास दो परिवार है एक उसे जन्म देने वाले मातापिता और दूसरा जयदीप का परिवार  परिवार कहता है। इस घटना के सामने आने के बाद वाकई यह सवाल तो सामने आ ही रहा है की पुनर्जन्म जैसी घटना वाकई होती है जिसे आजतक स्पष्ट रूप से मान्यता नहीं है लेकिन पुनर्जन्म पर भरोसा करने वाले लोगो के पक्ष में यह एक और उदाहरण जरूर जुड़ गया है

     

Reporter : Arunkumar,
RTI NEWS


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