​ ​ शहीद दिवस: 'उनके विचारों का कर्जदार भारत, आज भी होता है कमी का एहसास'
Friday, July 20, 2018 | 4:13:40 PM

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शहीद दिवस: 'उनके विचारों का कर्जदार भारत, आज भी होता है कमी का एहसास'

Friday, March 23, 2018 14:50:42 PM , Viewed: 2989
  • नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को शहीद दिवस के मौके पर भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी सिर्फ इसलिए कुर्बान कर दी ताकि और लोग अपनी जिंदगी को आजादी और सम्मान के साथ जी सकें। मोदी ने ट्वीट किया, "भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत हमारे इतिहास में क्रांतिकारी पल है। हर भारतीय को इस बात पर गर्व है कि ये महान विभूतियां हमारी भूमि से हैं।"

    उल्लेखनीय है कि अंग्रेजी हुकूमत ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को लाहौर षड्यंत्र मामले में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद आज ही के दिन फांसी पर लटका दिया गया था।

    उन्होंने राजनीतिज्ञ और कार्यकर्ता राम मनोहर लोहिया को भी उनके जन्मदिन पर याद करते हुए कहा कि वह '20 वीं सदी के भारत के सबसे उल्लेखनीय व्यक्तियों में से एक' हैं।

    क्या शहीद दिवस पर उन्हें याद करके प्रतिमा पर फूलमाला चढ़ाना ही काफी होगा? शायद नहीं क्योंकि अगर वास्तव में हम उनके व्यक्तित्व और विचारों को समझकर उन्हें अपनाने की कोशिश नहीं करते तो इस शहीद क्रांतिकारी को श्रद्धांजलि महज एक औपचारिकता रह जाएगी। यहां हम आज आपको भगत सिंह की कही कुछ बातें बताने जा रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप शहीद दिवस देश के वीर सपूतों को सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं।

      -आज से 87 साल पहले दुनिया छोड़कर जा चुके भगत सिंह के विचार, उनका व्यक्तित्व आज भी अमर है। वास्तव में उन्होंने अपनी ही कही एक बात को चरितार्थ किया कि 'मौत इंसान की होती है, विचारों की नहीं।' ये उनके विचार ही हैं जिन्होंने उन्हें लोगों के दिलोदिमाग में आज भी जिन्दा रखा है। उन्होंने अंग्रेजों के बारे में भी कहा था कि 'वह मेरे सिर को कुचल सकते हैं, विचारों को नहीं। मेरे शरीर को कुचल सकते हैं, मेरे जज्बे को नहीं'।
      - भगत सिंह हमेशा से बदलाव के हिमायती रहे। उन्होंने इस बात का जिक्र करते हुए कहा था, 'लोग हालात के अनुसार जीने की आदत डाल लेते हैं। बदलाव के नाम से डरने लगते हैं। ऐसी सोच को क्रांतिकारी विचारों से बदलने की जरूरत है।
      -भगत सिंह ने अंग्रेजी संसद में बम गिराने के बारे में बात करते हुए कहा  कि 'बहरों को अपनी बात कहने के लिए आवाज बुलंद होनी चाहिए।' उनका कहना था  हम किसी को मारने के बजाय बम गिराकर अंग्रेजी हुकूमत को जगा रहे थे कि अब उनके भारत छोड़ने का समय आ गया है। भगत सिंह अपना बलिदान देकर भी यही बात साबित की। आजादी की जिस आवाज के सुर अंग्रेजों के सामने धीमे थे, भगत सिंह की मौत से आहत होने के बाद वह आवाज मुखर हो उठी और अंग्रेजों को कड़े विरोध का सामना करना पड़ा।
      -भगत सिंह मुखर होकर अपनी बात कहने के हिमायती थे। उनका कहना था 'जो शख्स विकास का समर्थन करता है, उसे हर रूढ़िवादी चीजों की आलोचना करनी चाहिए और चुनौती देकर अपनी बात को जताना भी होगा।'
      -भगत सिंह अपने दम पर जिंदगी जीने के हिमायती थे। उनका कहना था 'जिंदगी अपने दम पर जी जाती है। दूसरों के कन्धों पर तो जनाजे उठते हैं।' अपनी इस बात से भगत सिंह देश के युवाओं के स्वाभिमान को आज भी ललकारते नजर आते हैं।

    भगत सिंह के आजादी के जुनून के कई किस्से सुनने को मिलते हैं। कहते हैं कि जलियावाला बाग में हुए नरसंहार से वह इतने आहत हुए थे कि घर से कई मील दूर घटना स्थल तक पैदल पहुंच गए थे। आज इस बात पर विचार करने की जरूरत है कि एक-दूसरे के हित के लिए ऐसे जुनून की मौजूदगी और गुंजाइश आज समाज में हैं या नहीं। खुद संघर्ष से कतराकर पड़ोस में भगत सिंह के पैदा होने की अपेक्षा के साथ बदलाव नहीं लाया जा सकता।

    'भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को मिले शहीद का दर्जा'
    केंद्र सरकार ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को अब तक शहीद का दर्जा नहीं दिया है. लुधियाना में सुखदेव थापर के परिवार वालों ने मातृभूमि पर अपना सब कुछ न्यौछावर कर देने वाली इन तीनों महान विभूतियों को शहीद का दर्जा देने की मांग की है. सुखदेव के परिवार वालों का कहना है, 'इन्होंने अपनी जीवन अपने देश के लिए कुर्बान कर दिया, लेकिन आज़ादी के 70 साल बाद भी इन्हें शहीद का दर्जा नहीं दिया गया है.'

    सुखदेव थापर के परिजन अशोक थापर ने कहा 'हम इस मांग को लेकर 23 मार्च (जिस दिन भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव शहीद हुए थे) को दिल्ली जाएंगे और वहां अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे. जब तक इन तीनों को शहीद का दर्जा नहीं मिलेगा हम भूख हड़ताल से नहीं हटेंगे. इस दौरान हमारे साथ भगत के परिवार के लोग भी शामिल होंगे.'

    23 मार्च को भगत सिंह शहीदी दिवस पर लोकसभा में उठी अवकाश की मांग
    वहीं दूसरी ओर शिरोमणि अकाली दल ने गुरुवार (22 मार्च) को लोकसभा में मांग उठाई कि 23 मार्च को भगत सिंह के शहीदी दिवस के मौके पर सदन में अवकाश घोषित किया जाए. अकाली दल के प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने 22 मार्च को शून्यकाल में हंगामे के दौरान ही यह मांग उठाई और शोर-शराबे के बीच उनकी बात ठीक से नहीं सुनी जा सकी. लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी कहा ‘कुछ सुनाई नहीं दे रहा.’

    सदन में लगातार 14 दिन से विभिन्न मुद्दों पर हंगामा चल रहा है और गुरुवार को भी अन्नाद्रमुक तथा वाईएसआर कांग्रेस के सदस्य अपनी अपनी मांगों को लेकर आसन के समीप नारेबाजी कर रहे थे. इसी बीच चंदूमाजरा को अपनी बात रखते हुए सुना गया. अकाली सांसद ने कहा कि कल शहीद भगत सिंह का शहीदी दिवस है. कल का अवकाश घोषित किया जाना चाहिए. उन्हें यह कहते भी सुना गया कि जहां से (भगत सिंह द्वारा) बम फेंका गया था, वह सीट रिजर्व की जाए और जहां बम गिरा था, वह स्थान चिह्नित किया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि सब लोगों को भगत सिंह के गांव जाकर उन्हें श्रद्धांजलि देनी चाहिए.  चंदूमाजरा ने कहा कि भगत सिंह ने अंग्रेज शासकों के खिलाफ बलिदान दिया था.

    पढ़िए भगत सिंह के 10 क्रांतिकारी विचार
    1. “जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधों पर जी जाती है, दूसरों के कंधे पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं।” “Life is lived on its own…other’s shoulders are used only at the time of funeral.”

    2. “प्रेमी, पागल और कवि एक ही चीज से बने होते हैं।”
    “Lovers, Lunatics and poets are made of same stuff.”

    3. “राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है। मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में भी आजाद है।”
    “Every tiny molecule of Ash is in motion with my heat I am such a Lunatic that I am free even in Jail.”

    4. “किसी को ‘क्रांति’ शब्द की व्याख्या शाब्दिक अर्थ में नहीं करनी चाहिए। जो लोग इस शब्द का उपयोग या दुरूपयोग करते हैं उनके फायदे के हिसाब से इसे अलग अलग अर्थ और अभिप्राय दिए जाते हैं।”
    “One should not interpret the word “Revolution” in its literal sense. Various meanings and significances are attributed to this word, according to the interests of those who use or misuse it.”

    5. “कोई भी व्यक्ति जो जीवन में आगे बढ़ने के लिए तैयार खड़ा हो उसे हर एक रूढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी, उसमे अविश्वास करना होगा और चुनौती भी देना होगा।”
    “Any man who stands for progress has to criticize, disbelieve and challenge every item of the old faith.”

    6. “किसी भी इंसान को मारना आसान है, परन्तु उसके विचारों को नहीं। महान साम्राज्य टूट जाते हैं, तबाह हो जाते हैं, जबकि उनके विचार बच जाते हैं।”
    “It is easy to kill individuals but you cannot kill the ideas. Great Empires crumbled, while the ideas survived.”

    7. “मैं इस बात पर जोर देता हूँ कि मैं महत्त्वाकांक्षा , आशा और जीवन के प्रति आकर्षण से भरा हुआ हूँ। पर मैं ज़रुरत पड़ने पर ये सब त्याग सकता हूँ, और वही सच्चा बलिदान है।”
    “I emphasize that I am full of ambition and hope and of full charm of life. But I can renounce all at the time of need, and that is the real sacrifice.”

    8. “व्यक्तियों को कुचल कर वे विचारों को नहीं मार सकते।”
    …by crushing individuals, they cannot kill ideas.”

    9. “क्रांति मानव जाति का एक अपरिहार्य अधिकार है। स्वतंत्रता सभी का एक कभी न ख़त्म होने वाला जन्म-सिद्ध अधिकार है। श्रम समाज का वास्तविक निर्वाहक है।”
    “Revolution is an inalienable right of mankind. Freedom is an imperishable birth right of all. Labour is the real sustainer of society.”

    10. “मैं एक मानव हूँ और जो कुछ भी मानवता को प्रभावित करता है उससे मुझे मतलब है।”
    ”I am a man and all that affects mankind concerns me.”

Reporter : ArunKumar,
RTI NEWS


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