​ ​ विशेषः स्टीफन हॉकिंग को ताउम्र नहीं मिला दुनियां का सबसे बड़ा नोबेल सम्मान..!
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विशेषः स्टीफन हॉकिंग को ताउम्र नहीं मिला दुनियां का सबसे बड़ा नोबेल सम्मान..!

Wednesday, March 14, 2018 20:07:48 PM , Viewed: 361
  • नई दिल्लीः अल्बर्ट आइंस्टीन के बाद सबसे ज्यादा सराहे जाने वाले सैद्धांतिक भौतिकविदों में से एक स्टीफन हॉकिंग कभी भी नोबेल पुरस्कार नहीं जीत सके । इसकी वजह ब्लैक होल और बिग बैंग के उनके सिद्धांत हैं, जो कभी सत्यापित नहीं हुए। इन्हें केवल सैद्धांतिक भौतिकी में ही स्वीकार किया गया।

    नेशनल ज्योग्राफिक पत्रिका में 'द साइंस ऑफ लिबर्टी' के लेखक टिमोथी फेरिस के मुताबिक, "समस्या यह है कि विचार को सत्यापित करने का कोई तरीका ही नहीं है।" नोबेल फाउंडेशन में मरणोपरांत व्यक्ति को शामिल नहीं किया जाता है।

    प्रोफेसर हॉकिंग के पास एक दर्जन से ज्यादा मानद उपाधियां थीं। साथ ही उन्हें 1982 में सीबीई से पुरस्कृत किया गया था। इसके अलावा 1985 में उन्हें रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी के स्वर्ण पदक से भी नवाजा गया था। वह रॉयल सोसायटी के साथी थे और अमेरिकी नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस के सदस्य थे।

    अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने ट्वीट कर कहा, "स्टीफन हॉकिंग को याद कर रहे हैं, वह एक महन भौतिकशास्त्री और विज्ञान के दूत थे। जिन चीजों को हम और दुनिया जानने की कोशिश कर रहे थे उनके सिद्धांतों ने उनके लिए करोड़ों संभावनाएं खोल कर रख दीं।"

    वह 'ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम : फ्रॉम द बिंग बैंग टू ब्लैक होल्स' जैसी कई लोकप्रिय किताबों के लेखक थे। उन्हें 1963 में मात्र 21 साल की उम्र में एम्योट्रॉपिक लेटरल स्केलेरोसिस (एएलएस) रोग हो गया था।  चिकित्सकों ने उनके केवल दो साल और जीवित रहने की उम्मीद जताई थी लेकिन हॉकिंग चिकित्सीय दावों को उलट कर दशकों तक जीवित रहे। भौतिक विज्ञानी ने शेष जीवन व्हीलचेयर पर बिताया और बात करने के लिए वह स्पीच सिंथेसाइजर का इस्तेमाल करते थे, इसके बावजूद उन्होंने शारीरिक कमजोरी को अपने रास्ते में आने नहीं दिया।

    आठ जनवरी 1942 में ऑक्सफोर्ड में जन्मे हॉकिंग्स को 1963 में मात्र 21 साल की उम्र में मोटर न्यूरॉन रोग हो गया था।  चिकित्सकों ने उनके केवल दो साल और जीवित रहने की उम्मीद जताई थी लेकिन हॉकिंग्स आधे से ज्यादा सदी तक जीवित रहे।

    जीवटता और जज़्बे की मिसाल रहे हॉकिंग ने मानव सभ्यता के लिए बड़ा नुक्सान है. इसकी भरपाई कैसे होगी पता नहीं. आइए पढ़ते हैं जावेद अख्तर की समय पर लिखी नज़्म के कुछ हिस्से.

     


    ये वक़्त क्या है? ये क्या है आख़िर कि जो मुसलसल गुज़र रहा है ये जब न गुज़रा था तब कहां था? कहीं तो होगा गुज़र गया है तो अब कहां है? कहीं तो होगा? कहां से आया किधर गया है? ये कब से कब तक का सिलसिला है ये वक़्त क्या है? … कभी कभी मैं ये सोचता हूं कि चलती गाड़ी से पेड़ देखो तो ऐसा लगता है दूसरी सम्त जा रहे हैं मगर हक़ीक़त में पेड़ अपनी जगह खड़े हैं तो क्या ये मुमकिन है सारी सदियां क़तार-अंदर-क़तार अपनी जगह खड़ी हों ये वक़्त साकित हो और हम ही गुज़र रहे हों ... ये वक़्त क्या है?

    बिगबैंग के पहले क्याज था संसार में? स्टीगफन हॉकिंग ने किया खुलासा:

    आज से करीब 13.8 अरब साल पहले ब्रह्मांड बहुत छोटे से आकार से बढ़ना शुरु हुआ था। फिर बहुत ज्यादा तापमान और फोर्स के दम पर इसका आकार बढ़ना शुरु हुआ। इसके बाद अणुओं को आपस में मिलना शुरु हुआ। पहले उनका आकार बहुत बढ़ा और फिर उनका विघटन शुरु हुआ, जिससे तमाम तारा मंडल, ग्रह और आकाश गंगाएं अस्तित्वफ में आईं। यही बिगबैंग था, जिससे हमारा संसार बना और आजतक ब्रह्मांड का आकार धीरे धीरे बढ़ रहा है। पूरी दुनिया के वैज्ञानिक ब्रह्मांड के बारे में यही जानते हैं, लेकिन इस बिगबैंग के पहले क्या था या कहें कि दुनिया कैसी थी, इस पर अब तक वैज्ञानिक कुछ खास नहीं जान सके हैं और इस पर वैज्ञानिकों की बहस का कोई रिजल्टि नहीं निकल पाया है। इसी बीच वर्ल्डज फेमस वैज्ञानिक स्टीकफन हॉकिंग ने टीवी शो StarTalk पर खुलासा करते हुए बताया है कि बिगबैंग के पहले आखिर क्यास हुआ करता था।

    क्या बताया स्टीफन हॉकिंग ने:
    वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने इस शो के होस्टआ और एस्ट्रो फिजीसिस्टो नील डिग्रास से बात करते हुए बताया कि बिगबैंग के पहले क्या था, इस बारे में मेरा यह कहना है कि वो जितना आसान था उतना ही ज्यािदा कॉम्लेे क्सो था, क्योंयकि वास्तिव में बिगबैंग से पहले कुछ नहीं था। हॉकिंग ने कहा कि एल्ब्र्ट आइंसटाइन की जनरल थ्योशरी ऑफ रिलेटीविटी के अनुसार स्पेहस और टाइम ने साथ मिलकर दुनिया में स्पेटस और समय का कभी न रुकने वाला चक्र बनाया है, लेकिन सच में वो बिल्कु ल सपाट नहीं है बल्कि ऊर्जा और भौतिक पदार्थ के दबाव के कारण ये आपस में घूमा हुआ है। यहीं वजह है कि इसे समझ पाना आसान नहीं है।

    स्टीसफन हॉकिंग ने बताया, बिगबैंग के पहले 'समय' का भी अस्तित्व नहीं था:
    बिगबैंग के पहले की दुनिया को लेकर स्टी फन हॉकिंग ने एक काफी नया विचार इस रखा है जो चौंकाने वाला है। उनका कहना है कि बिगबैंग के पहले टाइम यानि समय का भी कोई अस्तित्वख नहीं था। वो कहते हैं कि Einstein के सिद्धांत के मुताबिक ब्रह्मांड की उत्प्त्ति के समय संसार में मौजूद सभी भौतिक पदार्थ और ऊॅर्जा बहुत ही छोटी जगहों पर केंद्रित थी, लेकिन उनकी यह थ्यो्री बिगबैंग के पहले और बाद की कंडीशन के बीच कोई गणितीय लिंक नहीं बताती।
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    स्टीहफन हॉकिंग की थ्यो रीज दुनिया के लिए अचंभा:
    वैसे तो स्टीटफन हॉकिंग हमारी दुनिया और हमारे भविष्या के बारे में इससे पहले भी बहुत कुछ बता चुके हैं। जैसे कि उनका मानना है कि कोई भी एलियन प्रजाति हम इसांनो को खत्मब नहीं करेंगे, बल्कि विज्ञान द्वारा बनाया गया आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस ही धरती पर हम इसांनों को रिप्ले स कर देगा। उनका तो यह भी कहना है कि इंसानों जल्दीं से जल्दीर इस धरती को छोड़ देना चाहिए। स्टी।फन हॉकिंग के लॉजिक्सा भले ही कई बार आम लोगों को समझ नहीं आते हैं, लेकिन वैज्ञानिक उनके दिमाग का लोहा मानते हैं।

    समय को गणित की कल्पना बताने वाले वैज्ञानिक
    दुनिया की मौजूदा जनसंख्या में ज्यादातर ने आइंस्टीन को नहीं देखा, न्यूटन के सिर्फ किस्से सुने हैं. मगर हमें हॉकिंग्स के समय में पैदा होने का सौभाग्य मिला था. वैसे प्रोफेसर हॉकिंग्स ने दुनिया से जाने के लिए जो दिन चुना वो अद्भुत है. उतना ही अद्भुत जितना उनका समय को समझने का सिद्धांत.

    3-14 यानी चौदह मार्च π पाई की तारीख है. पाई अनंत तक जाने वाली संख्या है. बचपन में आपने गणित में π का मान 22/7 से निकाला होगा. 3.14.... आप गणना करते जाइए, सिलसिला चलता रहेगा. आइंस्टीन इसी तारीख को दुनिया में आए. मार्क्स और अब प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग्स इसी तारीख को दुनिया से गए. इन लोगों ने जो विचार शुरू किए उनका अंत कहीं नहीं नहीं है. उसकी संभावनाएं कहीं खत्म नहीं होतीं.
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    हॉकिंग की किताब ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम दुनिया भर में चर्चित किताब है. इसको हर बार पढ़ने के बाद आपको कुछ नया समझ में आएगा. दुनिया और समय के बारे में. आइंस्टीन ने दुनिया को बताया कि संसार मात्र दो चीजों से बना है. एक द्रव्यमान है और दूसरा ऊर्जा है. हॉकिंग ने बताया कि संसार की उत्पत्ति कैसे हुई.

    जब अंतरिक्ष भी नहीं था
    हॉकिंग की मानें तो ब्रह्मांड की शुरुआत दो चीज़ों से हुई. एक मैटर था और एक ऐंटी मैटर. एक बहुत बड़ा विस्फोट हुआ. बिग बैंग के नाम से जाने वाले इस विस्फोट के बाद मैटर बढ़ता चला गया और एंटी मैटर कम होता गया. इसके साथ ही ढेर सारी ऊर्जा बनी.

    हॉकिंग ने ब्लैक होल के बारे में भी बताया. आम भाषा में ब्लैक होल किसी तारे के मरने से पैदा हुई रचना है. इसमें बहुत ज्यादा गुरुत्वाकर्षण होता है. इतना ज्यादा कि प्रकाश तक को खींच ले. उदाहरण के लिए अगर आप एक गेंद सामने की तरफ फेंके तो वो कुछ दूर जाकर गिर जाएगी. क्योंकि ग्रैविटी उसको नीचे खींच लेगी. ब्लैक होल में अगर कोई टॉर्च लेकर सामने दीवार की तरफ जलाए तो रौशनी दीवार पर टकराने की जगह नीचे जमीन पर गिर पड़ेगी.
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    प्रोफेसर हॉकिंग्स के सिद्धांतों के बाद समय को एक नए तरीके से देखा जा सकता है. काल्पनिक समय या इमेजनरी टाइम का कॉन्सेप्ट समय को गणित के नियमों में बांधकर देखता है. जैसे हम गणित में माना कि ये बराबर एक्स मान लेते हैं. समय भी मानी हुई चीज़ हो सकती है.

    हमें लगता है कि समय चल रहा है. शताब्दियां बदल रही हैं. ऐसा भी तो हो सकता है कि हम चल रहे हैं और समय वहीं रुका हुआ है. सड़क पर गाड़ी चल रही है. तो हमें लगता है कि पेड़ पीछे जा रहे हैं. मगर क्या सच में ऐसा है? सड़क वहीं है, पेड़ वहीं हैं ये तो हम हैं जो चल रहे हैं. इसका मतलब हुआ कि जो पेड़ हमारे पीछे छूट गया है वो कहीं तो होगा. जो आने वाला है वो भी कहीं तो होगा. इसी पर जावेद अख्तर की एक नज़्म भी है, ये वक्त क्या है.

    स्टीफन ने 1000 साल के अंदर दुनिया के आग का गोला बन जाने की बात भी कही है. मतलब जितना समय कुतुबमीनार को अब तक हुआ है, आज से उतने समय बाद दुनिया में इंसान का नामों निशान नहीं रहेगा. इसी के लिए वो दूसरे ग्रहों पर बसने वाले जीवन की संभावनाओं की तलाश कर रहे थे. एक ऐसा अंतरिक्षयान जो प्रकाशवर्ष की दूरी बहुत कम समय में पूरी कर सके. मगर ऐसा हो नहीं सका. इससे पहले ही प्रोफेसर हॉकिंग्स दुनिया छोड़कर चले गए.

    पढ़ें स्टीफन हॉकिंग के 10 कोट्स
    1. बुद्धिमत्ता बदलाव को अपनाने में ही है - स्टीफन हॉकिंग
    2. लोगों के पास आपके लिए आपके लिए वक्त नहीं होगा अगर आप हमेशा गुस्सा या शिकायत करेंगे  - स्टीफन हॉकिंग 
    3. मैं मौत से नहीं डरता, लेकिन मुझे मरने की कोई जल्दी नहीं. मुझे अभी बहुत काम करना है - स्टीफन हॉकिंग
    4. लाखों सालों से इंसान जानवरों की तरह जी रहा था. और फिर कुछ हुआ जिससे हमारी कल्पनाशक्ति जागी. हमने बोलना और सुनना दोनों सीखा - स्टीफन हॉकिंग 
    5. काम से हमें जीवन का उद्देश्य मिलता है इसके बिना लाइफ कुछ नहीं - स्टीफन हॉकिंग 
    6. जो लोग अपने I.Q के बारे में डींगे हांकते हैं वो लूजर होते हैं -  स्टीफन हॉकिंग  
    7. भगवान शायद हो, लेकिन विज्ञान हमें बिना ब्रह्मांड के निर्माता के इसे समझने में मदद कर सकता है -  स्टीफन हॉकिंग  
    8. लाइफ बहुत दुखी होगी अगर हम फनी नहीं होंगे  -  स्टीफन हॉकिंग 
    9. महिलाएं पूरी तरह से रहस्य से भरी हुई हैं -  स्टीफन हॉकिंग 
    10. मेरा मानना है कि चीज़े खुद को असंभव नहीं बना सकती -   स्टीफन हॉकिंग

    दुनिया के तीन महान साइंटिस्ट और इनके जन्म-मृत्यु का अजब संयोग
    आज 14 मार्च को ऐसा अजब संयोग बना जो साइंस की दुनिया के लिए काफी हैरान करने वाला है। आज के दिन दुनिया के दो सबसे मशहूर साइंटिस्ट में से एक का जन्म हुआ और दूसरे की मौत। आज के दिन यानी 14 मार्च 1879 को मशहूर साइंटिस्ट अल्बर्ट आइन्सटाइन का जन्म हुआ था। आइन्सटाइन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि आज भी बच्चों से लेकर बूढ़े हों या साइंस में इंटरेस्ट न रखने वाले भी इस नाम को बखूबी जानते हैं। वहीं दूसरी ओर आइन्सटाइन के बाद मॉर्डन दुनिया के जाने-माने साइंटिस्ट स्टीफन हॉकिंग का आज ही के दिन निधन हो गया। इसमें एक तीसरे महान साइंटिस्ट का भी ऐसा संयोग जुड़ा है जिसने साइंटिस्ट्स को भी हैरान कर दिया है।

     


    ये है अजब संयोगः आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस दिन स्टीफन हॉकिंग्स का जन्म हुआ ठीक उसी तारीख को महान साइंटिस्ट गैलीलियो की भी मौत हुई थी। गैलीलिया की मौत 8 जनवरी 1642 को हुई थी। जबकि स्टीफन हॉकिंग्स का जन्म ठीक 300 सालों बाद 8 जनवरी 1942 को हुआ।
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    अगर इन तीनों कड़ियों को जोड़े तो हम पाएंगे के स्टीफन हॉकिंग का जन्म और उनकी मृत्यु की तारीख दुनिया के दो और महान साइंटिस्ट्स से जुड़ी हुई है। 14 मार्च यानी आज के दिन स्टीफन का निधन हुआ, जोकि अल्बर्ट आइन्सटाइन की जन्म तारीख है। वहीं 8 जनवर को स्टीफन पैदा हुए जो कि महान गैलीलियो के निधने की तारीख है।

    76 का संयोगः- हैरानी की बात ये भी है आइन्सटाइन की मौत भी 76 साल की उम्र में हुई और अब स्टीफन का निधन भी 76 साल की उम्र में हो गया। यही नहीं गैलीलियो का निधन 77 साल की उम्र में हुआ था

    21 साल की उम्र में हुई थी बीमारीः हॉकिंग का जन्म ब्रिटेन में आठ जनवरी 1942 को हुआ। 21 साल की उम्र में उन्हें लाइलाज बीमारी हो गई। वे कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में सैद्धांतिक ब्रह्मांड विज्ञान के निदेशक थे। हॉकिंग की गिनती आइंस्टीन के बाद सबसे बड़े भौतिकशास्त्री के तौर पर होती है। कंप्यूटर और विभिन्न गैजेट्स के जरिए वे अपने विचार व्यक्त करते थे। ब्लैक होल और बिग बैंग थ्योरी को समझने में उन्होंने अहम योगदान दिया है।

Reporter : ArunKumar,
RTI NEWS


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