​ ​ Read: 6 साल में कितना बदला पाकिस्तान, जिसके बाद स्वदेश लौटी मलाला..?
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Read: 6 साल में कितना बदला पाकिस्तान, जिसके बाद स्वदेश लौटी मलाला..?

Thursday, March 29, 2018 11:53:27 AM , Viewed: 200
  • इस्लामाबाद: नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई छह सालों के बाद गुरुवार को अपने मुल्क पाकिस्तान लौटीं है। वर्ष 2012 में लड़कियों की शिक्षा की वकालत करने के लिए तालिबानी आतंकवादियों ने उनके सिर पर गोली मार दी थी। 'जियो' के मुताबिक, 20 वर्षीया मलाला लंदन से बीती रात करीब 1.41 बजे अपने माता-पिता के साथ इस्लामाबाद पहुंची।

    मलाला प्रधानमंत्री शाहिद खकान अब्बासी और सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण शख्सियतों से मुलाकात कर सकतीं हैं।

    वर्ष 2014 में मलाला को भारत के बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले कैलाश सत्यार्थी के साथ नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। स्वात घाटी की रहने वाली मलाला को प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने गोली मार दी थी जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए पाकिस्तान से बर्मिघम भेज दिया गया था।

    मलाला ने ठीक होने के बाद लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक आंदोलन की घोषणा की। पिछले साल कनाडा के दौरे पर मलाला को देश की संसद को संबोधित करने का अवसर मिला था।

    इस घटना ने लड़कियों की शिक्षा की पुरजोर वकालत करने वाली मलाला के दुनिया भर में मानवाधिकारों का प्रतीक बना दिया. घटना के बाद मलाला ब्रिटेन चली गई, जहां उनका इलाज बर्मिंघम में हुआ और उसने अपनी स्कूली शिक्षा भी वहीं पूरी की. मलाला 2014 में सबसे कम उम्र में नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाली व्यक्ति बनीं. वह फिलहाल ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से अपनी शिक्षा पूरी कर रही हैं.

    मलाला पर हमला क्यों हुआ था?
    11 साल की उम्र में मलाला ने बीबीसी उर्दू सेवा के लिए एक गुमनाम ब्लॉग लिखना शुरू किया था. इस ब्लॉग में वो तालिबान शासन के दौरान अपने जीवन के बारे में लिखा करती थीं. मलाला महिला शिक्षा को लेकर शुरुआत से ही मुखर रही हैं, इसलिए तालिबान ने जान-बूझकर उन्हें निशाना बनाया. वो पंद्रह साल की थीं जब उनकी स्कूल बस पर हमला किया गया. उस वक़्त इस घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था. पाकिस्तानी तालिबान ने इस हमले के बाद जारी किए बयान में कहा था कि मलाला पश्चिमी सभ्यता की समर्थक हैं और पश्तो इलाक़े में वो इसका प्रचार कर रही हैं.

    मलाला ने तब से अब तक क्या किया?
    पूरी तरह से फ़िट होने के बाद मलाला ने बच्चों की शिक्षा और उनके अधिकारों के बारे में बोलना शुरू किया. इसके बाद अपने पिता ज़ियाउद्दीन के साथ मिलकर उन्होंने 'मलाला फ़ंड' नाम की एक चैरिटी संस्था की स्थापना की जिसका मक़सद दुनिया की हर लड़की के लिए शिक्षा की व्यवस्था करना है. साल 2014 में मलाला नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाली सबसे युवा हस्ती बनीं. साथ ही पहली पाकिस्तानी भी जिसने ये अवॉर्ड जीता. फ़िलहाल वो ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ रही हैं और पढ़ाई के साथ अपने अभियान पर काम कर रही हैं.

    मलाला पर हमला
    2012 को तालिबानी आतंकी उस बस पर सवार हो गए जिसमें मलाला अपने साथियों के साथ स्कूल जाती थीं। उनमें से एक ने बस में पूछा, ‘मलाला कौन है?’ सभी खामोश रहे लेकिन उनकी निगाह मलाला की ओर घूम गईं। इससे आतंकियों को पता चल गया कि मलाला कौन है। उन्होंने मलाला पर एक गोली चलाई जो उसके सिर में जा लगी। मलाला पर यह हमला 9 अक्टूबर 2012 को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात घाटी में किया था। गंभीर रूप से घायल मलाला को इलाज के लिए ब्रिटेन ले जाया गया। यहां उन्हें क्वीन एलिजाबेथ अस्पताल में भर्ती कराया गया। देश-विदेश में मलाला के स्वस्थ्य होने की प्रार्थना की गई और आखिरकार मलाला वहां से स्वस्थ होकर लौटीं।

    मलाला को मिल चुके हैं कई पुरस्कार
    जब वह स्वस्थ हुई तो अंतरराष्‍ट्रीय बाल शांति पुरस्कार, पाकिस्तान का राष्ट्रीय युवा शांति पुरस्कार (2011) के अलावा कई बड़े सम्मान मलाला के नाम दर्ज होने लगे। 2012 में सबसे अधिक प्रचलित शख्सियतों में पाकिस्तान की इस बहादुर बाला मलाला युसूफजई के नाम रहा। लड़कियों की शिक्षा के अधिकार की लड़ाई लड़ने वाली साहसी मलाला यूसुफजई की बहादुरी के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा मलाला के 16वें जन्मदिन पर 12 जुलाई को मलाला दिवस घोषित किया गया। मलाला को साल 2013 में भी नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था।  2013 में ही मलाला को यूरोपीय यूनियन का प्रतिष्ठित शैखरोव मानवाधिकार पुरस्कार भी मिला।

    क्या पाकिस्तान में अब भी ख़तरा है?
    पाकिस्तानी फ़ौज की तमाम कोशिशों के बावजूद पाकिस्तानी तालिबान सक्रिय हैं. पाकिस्तानी तालिबान कई स्कूलों और कॉलेजों पर हमला कर सैकड़ों बच्चों की जान ले चुका है. मलाला यूसुफ़ज़ई ने अपने कई साक्षात्कारों में कहा है कि वो पाकिस्तान जाना चाहती हैं और स्वात घाटी में अपने घर को देखना चाहती हैं. स्वात घाटी के बारे में मलाला ने कहा था कि वो जगह धरती का स्वर्ग है.

    कौन हैं मलाला यूसुफजई?
    मलाला का जन्म 1997 में पाकिस्तान के खैबर पख्‍तूनख्‍वाह प्रांत के स्वात जिले में हुआ। मलाला के पिता का नाम जियाउद्दीन यूसुफजई है। तालिबान ने 2007 से मई 2009 तक स्वात घाटी पर कब्जा कर रखा था। इसी बीच तालिबान के भय से लड़कियों ने स्कूल जाना बंद कर दिया था। मलाल तब आठवीं की छात्रा थीं और उनका संघर्ष यहीं से शुरू होता है।

    2008 में तालिबान ने स्वात घाटी पर अपना नियंत्रण कर लिया. वहां उन्होंने डीवीडी, डांस और ब्यूटी पार्लर पर बैन लगा दिया। साल के अंत तक वहां करीब 400 स्कूल बंद हो गए। इसके बाद मलाल के पिता उसे पेशावर ले गए जहां उन्होंने नेशनल प्रेस के सामने वो मशहूर भाषण दिया जिसका शीर्षक था- हाउ डेयर द तालिबान टेक अवे माय बेसिक राइट टू एजुकेशन? तब वो केवल 11 साल की थीं।

Reporter : ArunKumar,
RTI NEWS


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