​ ​ दिल्ली : अल्पसंख्यक क्षेत्रों में अधिक मतदान से बदल सकते हैं समीकरण
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दिल्ली : अल्पसंख्यक क्षेत्रों में अधिक मतदान से बदल सकते हैं समीकरण

Wednesday, May 15, 2019 23:35:06 PM , Viewed: 410
  •  नई दिल्ली, 15 मई | लोकसभा चुनाव के लिए 12 मई को दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाकों में हुआ अधिक मतदान तीनों मुख्य राजनीतिक पार्टियों आम आदमी पार्टी, कांग्रेस व भाजपा के लिए चिंता का सबब बन गई है।

      यहां त्रिकोणीय मुकाबला बनता दिख रहा है।

    दिल्ली की कुल सात लोकसभा सीटों में से तीन सीटों पर मुस्लिमों की काफी अहम भूमिका है। मतदान के दिन खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों में अधिक मतदान हुआ है। चांदनी चौक, उत्तर पूर्वी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली में मुस्लिमों की तादाद अच्छी-खासी है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर मुस्लिम समुदाय ने आप या कांग्रेस में से किसी एक पार्टी को अपना वोट दिया तो इसका तीनों ही पार्टियों को नुकसान होगा। जबकि अगर वोट बंट जाता है तो फिर भाजपा को फायदा मिलेगा।

    रविवार को दिल्ली की सभी सीटों पर 60.5 प्रतिशत मतदान हुआ। वहीं मुस्मिम बहुल क्षेत्र में अपेक्षाकृत अधिक मतदान देखने को मिला। चिलचिलाती गर्मी और रमजान के दौरान रोजा रखने के बावजूद मुस्लिम बहुल इलाके बल्लीमारान में 68.3 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। वहीं शकूरबस्ती, मटिया महल और सीलमपुर में क्रमश: 68.7, 66.9 और 66.5 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

    चूंकि एक समुदाय से संबंधित मतदान का रिकॉर्ड नहीं है, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि इन क्षेत्रों में कितने मुस्लिमों ने मतदान किया है। मुस्लिम बहुल इलाकों में अच्छी वोटिंग होने के कारण यही अनुमान लगाया जा रहा है कि इस मतदान में मुस्लिमों की संख्या अधिक रही है।

    त्रिलोकपुरी में 65.4, मुस्तफाबाद में 65.2, बाबरपुर में 62.1 और चांदनी चौक में 59.4 प्रतिशत मतदान हुआ है। इनमें ओखला क्षेत्र अपवाद है, जहां पर महज 54.8 प्रतिशत मतदान ही दर्ज किया गया है। इसके अलावा अन्य मुस्लिम बहुल क्षेत्र जैसे मुस्तफाबाद और बाबरपुर में क्रमश: 65.22 और 62.14 प्रतिशत मतदान हुआ है।

    दिल्ली में लोकसभा चुनाव-2019 में कुल 60.34 प्रतिशत मतदान हुआ है जोकि पिछले लोकसभा चुनाव-2014 से कम है। 2014 में बल्लीमरान में 67.17, मटिया महल में 66.81, ओखला में 58.21 और सीलमपुर में 68.11 प्रतिशत मतदान हुआ था।

    विशेषज्ञों के अनुसार अधिकतर मुस्लिमों की वोट कांग्रेस या आम आदमी पार्टी को ही गई है। हालांकि अगर अधिकतर वोट इन दोनों पार्टियों में बंट जाती है, तो फिर इससे निश्चित तौर पर भाजपा को फायदा पहुंचेगा।

    आईएएनएस ने क्षेत्र के मुस्लिमों से बात की तो पाया कि मुस्लिमों ने आम आदमी पार्टी की अपेक्षा कांग्रेस को अपना समर्थन दिया है। अंजुम जाफरी ने बताया कि लोग केंद्र से गुस्से में हैं और उन्होंने मतदान के दिन बड़ी संख्या में वोट कर अपना गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने बताया कि सभी मुस्लिम जानते हैं कि यह चुनाव राष्ट्रीय है और आम आदमी पार्टी को वोट देना सीधे तौर पर सत्ताधारी पार्टी को फायदा पहुंचाने वाला कदम होगा। अंजुम ने वोट बंटने की संभावना वाले सवाल पर कहा कि अगर यह 50-50 प्रतिशत बंटता तो अधिक अंतर पैदा करता, मगर परिस्थिति अलग है और इस संबंध में वोट का अनुपात 85:15 रहेगा।

    इसी के साथ उत्तर पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद क्षेत्र निवासी नईम अंसारी का कहना है कि उनके क्षेत्र में काफी लोग ऐसे हैं जोकि आम आदमी पार्टी के प्रति वफादार थे। मगर उन्होंने भी लोकसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस को ही अपना वोट दिया है। अंसारी ने कहा कि यह चुनाव पार्षद या विधायक का नहीं बल्कि सांसद का था। चूंकि मुकाबला भाजपा के साथ था, इसलिए उन्होंने आम आदमी पार्टी के बजाए कांग्रेस का साथ दिया।

    कांग्रेस भी यह दावा कर रही है कि 80 प्रतिशत मुस्लिम वोट उसी के हिस्से आए हैं और लोग कह रहे हैं कि भाजपा के विरुद्ध कांग्रेस ही सबसे बेहतर विकल्प है। जिसने समुदाय के लोगों के मन में डर वाली मनोवृत्ति पैदा की है।

    दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष एवं दिल्ली के पूर्व मंत्री हारून युसूफ का कहना है कि इन क्षेत्रों के लोग भाजपा सरकार की नीतियों से सबसे अधिक प्रभावित थे। इसलिए वह अधिक संख्या में वोट डालने के लिए आए। युसूफ ने आईएएनएस को बताया कि चाहे वह मुस्लिम हों या दलित, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने लगातार एक संदेश देने का प्रयास किया है कि वही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुकाबला कर सकते हैं। इसलिए वह कह सकते हैं कि 80 प्रतिशत मुस्लिमों ने कांग्रेस का समर्थन किया है।

    मुस्मिल बहुल क्षेत्रों में प्रचार करते समय भी दोनों ही पार्टियों ने मतदाताओं से समझदारी के साथ वोट करने की अपील की थी और यह अहसास भी दिलाया था कि अगर वोट बंटा तो इसका फायदा भाजपा को मिलेगा। वहीं दूसरी ओर भाजपा का दावा है कि चाहे मुस्लिम वोट बंटे हों या नहीं, मगर उनकी पार्टी को फायदा ही मिलेगा।

    दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता प्रवीन शंकर कपूूर ने आईएएनएस को बताया कि अगर मुस्लिम वोटों का ध्रुविकरण हुआ होगा तो फिर निश्चित तौर पर अधिकतर हिंदू वोटों का भी ध्रुवीकरण हुआ होगा, जिसका फायदा उनकी पार्टी को मिलेगा। यह प्रत्यक्ष तौर पर दिख रहा है जो उन्हें फायदा पहुंचाएगा।

    केंद्रीय मंत्री एवं चांदनी चौक संसदीय क्षेत्र के उम्मीदवार हर्षवर्धन ने आईएएनएस से कहा कि वह नहीं मानते कि किसी हिंदू या मुस्लिम बहुल इलाके में अधिक मतदान होने से किसी पार्टी को अलग से कोई फायदा होगा। उन्होंने कभी हिंदू या मुस्लिम के नाम पर नीतियां नहीं बनाई। हर्षवर्धन ने कहा कि अगर आप मुझसे पूछेंगे कि मेरे संसदीय क्षेत्र में कितने मुस्लिम हैं तो मैं इसका उत्तर नहीं दे सकूंगा। मगर वह इस बात पर आश्वस्त हैं कि मुस्लिम उनके लिए वोट करेंगे।

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