​ ​ ममता सरकार से हल्के गतिरोध के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा पर व्यापार अब शुरू
Monday, August 10, 2020 | 5:20:22 PM

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ममता सरकार से हल्के गतिरोध के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा पर व्यापार अब शुरू

Tuesday, July 7, 2020 16:11:32 PM , Viewed: 122
  • ढाका, 7 जुलाई । पश्चिम बंगाल सरकार ने बेनापोल लैंड पोर्ट के जरिए जाशोर तक बांग्लादेशी वस्तुओं को आने की अनुमति दे दी है। बांग्लादेश के निर्यातकों द्वारा भारतीय वस्तुओं के आयात को बंद करने के तीन दिन बाद यह अनुमति दी गई।

    बेनापोल-पेट्रापोल लैंड पोर्ट के माध्यम से बांग्लादेश व भारत में निर्यात और आयात गतिविधियां रविवार शाम को फिर से शुरू हुईं। बांग्लादेशी निर्यातकों की हड़ताल के तीन दिन बाद यह व्यापार शुरू हुआ है। स्थानीय निर्यातकों का कहना है कि भारत द्वारा अपना माल बांग्लादेश भेजने लेकिन बांग्लादेशी सामान के आयात को रोकने के फैसले की जवाबी कार्रवाई में उन्होंने हड़ताल की।

    बेनापोल लैंड पोर्ट पर व्यापारिक संगठनों ने भारतीय वस्तुओं के आयात पर एक जुलाई को रोक लगा दी थी। इन्होंने भारतीय पक्ष पर बांग्लादेशी निर्यात वस्तुओं के प्रवेश को अनुमति देने से इनकार का आरोप लगाया था।

    बांग्लादेश के विदेश मंत्री, ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग, बेनापोल के सीमा शुल्क अधिकारी, बेनापोल भूमि बंदरगाह प्राधिकरण और दोनों देशों के व्यापारिक संगठन रविवार को सुलह के लिए सामने आए। परिणामस्वरूप, भारतीय सामान से लदे पांच ट्रकों ने बांग्लादेश में प्रवेश किया, जबकि शाम को निर्यात वस्तुओं वाले पांच बांग्लादेशी ट्रकों ने भारत में प्रवेश किया।

    बांग्लादेश के विदेश मंत्री ए. के. अब्दुल मोमन ने कहा कि पश्चिम बंगाल राज्य सरकार के साथ लंबी बातचीत के बाद बेनापोल-पेट्रापोल भूमि बंदरगाह के माध्यम से भारत-बांग्लदेश व्यापार फिर से शुरू हुआ।

    बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने एक वीडियो ब्रीफिंग में कहा, "हमने, भारत और बांग्लादेश की सरकारों ने, मिलकर फैसला किया कि हम अपना व्यापार जारी रखेंगे। लेकिन, पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा लगाए गए अचानक प्रतिबंध के कारण हमारा व्यापार रोक दिया गया।"

    उन्होंने कहा, "बीती 23 मार्च से हमारे देश से माल ले जाने वाले किसी भी ट्रक को पेट्रापोल-बेनापोल पोर्ट लैंड के माध्यम से प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई। जबकि, बांग्लादेशी उत्पाद हमेशा की तरह त्रिपुरा और भारत के अन्य स्थानों पर जा रहे हैं।"

    उन्होंने कहा, "केवल पश्चिम बंगाल सरकार ने यह बात कही कि लॉकडाउन के कारण वे किसी भी ट्रक को बांग्लादेश जाने नहीं देंगे।"

    मोमन ने कहा, "ममता बनर्जी सरकार ने कहा था कि अगर कोई भारतीय ट्रक बांग्लादेश में प्रवेश करता है, तो ड्राइवर को अनुमति नहीं दी जाएगी, केवल उत्पादों को दी जाएगी। लिहाजा, ड्राइवर सामान लेकर बांग्लादेश नहीं आए।"

    विदेश मंत्री ने कहा, "फिर यह तय किया गया कि ड्राइवर बांग्लादेश में प्रवेश नहीं करेंगे। वे सिर्फ अपना माल उतारेंगे जिन्हें बांग्लादेशी ट्रकों में अपलोड किया जाएगा। इस तरह से भारतीय माल का आयात किया जाएगा। लेकिन यह काफी महंगा साबित हुआ। इसके अलावा एक दिन में 4-5 से अधिक ट्रक से माल नहीं उतारे जा सके। इस कारण इस व्यवस्था को छोड़ दिया गया।"

    उन्होंने कहा कि लंबी चर्चा के बाद, रेल द्वारा माल ले जाने का निर्णय लिया गया और रेल से माल आ रहा है।

    मोमन ने कहा, "इस बीच भारतीय सामान पेट्रापोल लैंड पोर्ट की सीमा पर आ रहे थे, हमें कोई आपत्ति नहीं थी। यह जारी रहा।"

    मोमन ने कहा, "लेकिन, पश्चिम बंगाल सरकार ने हमारे ट्रक को पेट्रापोल लैंड पोर्ट में प्रवेश नहीं करने दिया। लॉकडाउन के कारण बांग्लादेश के निर्यात को रोक दिया गया जिससे सी एंड एफ एजेंट परेशान हो गए।"

    चूंकि, बांग्लादेश के व्यापारियों को बहुत नुकसान हो रहा था, इसलिए उन्होंने भारतीय पक्ष द्वारा बांग्लादेशी निर्यात वस्तुओं को रोके जाने के विरोध में बांग्लादेश में भारतीय वस्तुओं के आयात को रोक दिया।

    मोमन ने कहा, "हमने पश्चिम बंगाल के नीति निर्माताओं के साथ लंबी चर्चा की। आखिरकार एक समझौता हुआ और अब बेनापोल-पेट्रापोल भूमि बंदरगाह से दोनों देशों के लिए माल ढुलाई शुरू हो गई है।"

    --आईएएनएस

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